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सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु माँ क्शचिद दुःखहारभवेत

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अभी फुलझड़ी पटाका बाद मे

Posted On: 31 Mar, 2013 Others,न्यूज़ बर्थ में

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आज काफी लंबे अंतराल के बाद जागरण पर जरा हवाखोरी के लिए निकला तो नीचे यीशु प्रभु घोषणा करवाने जा रहे थे ,गोया जागरण न हो गया अदालती हलफनामा हो गया ,, खैर जो हो लेकिन कुछ खटक गया

प्रकृति के ऐकदम विरुद्ध मानवता होती चली जा रही है यूं तो दुश्मनी के तीन कारण आम हैं जर ,जोरू ,जमीन ,, लेकिन चौथा कारण सबसे भारी है और जिसका सभी ने उपयोग किया है ,,धर्मांतरण पर आज भी लोगों मे मन / मत भेद हैं ,। यूं भी भारत की जमीन बहुत उर्वर है जहां जंगली घास फूस की तरह नए नए पंथ निरंतर उगते रहे हैं तो कुछ तो वल्लरी लताओं की तरह भारत को चूस चूस कर खुद को पल्लवित करते रहे हैं ,लेकिन भाई मुझे नही लगता कि आज तक किसी पंथ विशेष ने आम लोगों का भला किया हो ,समस्याएँ तो जस की तस पंथों ने एक नई उलझन पैदा कर दी कि तू बड़ा कि मै ,यार मुझे समझ नही आता कि सुरसा की तरह बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार ,महिलाओं के प्रति हिंसा और अपराध किस पंथ मे कम है जो कटोरा ले कर कहते हो अपना लो यहाँ तो कुछ गैरों ने बांटा कुछ अपनों ने ,, जिसकी परिणति आज का यह भारत है जहां कहने को तो विभिन्नता मे एकता है लेकिन सतरंगी छ्टा  का इंद्रधनुश आज तक नही बन पाया , आज यहाँ पर बहुदेशीय जनता का निवास है कोई किसी देश का नारा बुलंद कर रहा है तो कोई कहीं के गीत गा रहा हा सारे जहां से अच्छा तो जैसे खो सा गया है ,,आज भारत मे भारतीय न पैदा हो के विभिन्न विचारों के पोषक पैदा हो रहे हैं , जो रूदालियों की तरह हर दर पर आँसू बहा जाते हैं लेकिन भारत के लिए तो उनके दिल मे हरारत ही नही है

अभी बहुत से बलागरों को पढ़ा मुझे लगा बलागिंग मे भी लाबिंग हो रही है हाँ जी खुल के हो रही है अब इसमे किसी की माया है मनी है की मायनो है राम जाने,, लेकिन इससे देश का भला तो नही होने वाला हाँ इससे इतना तो पता अवश्य चलता है की भारत की शिक्षित जनता चमचागीरी मे आज भी नंबरी ही है देश तो घिसट ही रहा है कुछ लोग अर्थी को कांधा देने की सोच रहे हैं

आजकल तो एक नया क्विज का दौर चला है की प्रधानमंत्री कौन यानि की आज के प्रधानमंत्री को अभी से भूतपूर्व घोषित कर दिया ठीक ही है अभूतपूर्व भी वही हैं ,,

तो भैया कल एक अप्रेल है तो तैयार रहिए फुल फुल फूल बनाया जाएगा चिदम्बरम जी ने जो झुनझुना  दिखाया था उसे लेमनचूस बनाकर चुसवाया जाएगा ,,तो आटे दाल का भाव आँकते हुए मस्त रहिए………………..

चोंच से चोंच लड़ाते चलो ,

कुर्सी को अपनी बचाते चलो,

जेब भरी है डगर है कठिन,

जो मुह खोले लुटाते चलो ,

साथ जो छोड़े न छोड़ो उसे,

सीबीआई का डंडा घुमाते चलो,

आगे चुनाव जाल फेंको अभी,

जोरू नई तुम पटाते  चलो,

नये नये टांके फँसाते चलो,

चोंच से चोंच लड़ाते चलो ,, :) :)     …………………………………………..जय भारत

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
02/04/2013

आदरणीय अश्विनी जी,सादर .आज की राजनीति पर करार व्यंग्य है।

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
02/04/2013

जो अपने धर्म सिध्हंतो का नहीं हुआ वो बदल के दूजे का कैसे हो पायेगा मूरख कौन बन्ने वाले बनाने वाले हैप्पी मूर्ख दिवस. रात में ही मनाना. उल्लू रात में ही मिलेंगे बधाई

chaatak के द्वारा
01/04/2013

हर पार्टी का मूल मन्त्र है – ‘चोंच से चोंच लड़ाते चलो , कुर्सी को अपनी बचाते चलो,’ बहुत खूब बंधु !

alkargupta1 के द्वारा
01/04/2013

इस कुर्सी में इतना तगड़ा फेविकोल लगा हुआ है की जो इस पर बैठा वह फिर उठ ही नहीं सकता चिपक ही रहेगा और वहीँ से ही अपने करतब दिखता रहेगा आज की राजनीति पर अच्छा आलेख अश्विनी जी

jlsingh के द्वारा
01/04/2013

हाँ, अब ठीक है! फॉण्ट बड़ा हो गया!

nishamittal के द्वारा
31/03/2013

मुझको भी आश्चर्य हुआ ये देख कर अश्विनी जी ,कृपया फॉण्ट बड़ा रखें

jlsingh के द्वारा
31/03/2013

आदरणीय महोदय, सादर अभिवादन! आखिर एक साल २३ दिन बाद आपने अपने घर का रुख किया …वह भी एक अप्रैल से पहले वाले दिन …अब इतनी हिम्मत नहीं है, कि भाई जी को कहूं लौट के …. घर को आये! काश और काश (घास) को परिभाषित करने वाले महोदय को भला, …मै दूब ही तो हूँ! भैया जी, अपने फुलझड़ी अभी छोड़ी है …पर ये अक्षर फुलझड़ी की तरह कभी दीखते हैं कभी न भी दीखते हैं .. बड़ी कोशिश के बाद चश्मे का नंबर बढ़ा कर पढ़ने की कोशिश में नीचे वाली लाल लाइन पढ़ सका इससे आज की राजनीति के घटिया शक्ल ही नजर आयी. जर, जोडू और जमीन के बाद कुर्सी की मत्त आपने बड़ी बेहतर बताई … आज तो सभी इसी कुर्सी को हथियाने के फ़िराक में हैं चोंच से चोंच लड़ाना पड़े या और कुछ…… अब पटाखे का इंतज़ार रहेगा! हो सकता है यह प्रतिक्रिया आपको तुरंत न दिखे तो स्पैम को अप्प्रूव कर लीजियेगा! सादर आभार! पर मुखौटा तो हटाइए सर जी!


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